एसटीएफ जांच में मिली धांधली के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद, मुख्यमंत्री योगी ने दिया परीक्षा निरस्त करने का आदेश Assistant Professor Bharti 2026
एसटीएफ जांच में मिली धांधली के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद, मुख्यमंत्री योगी ने दिया परीक्षा निरस्त करने का आदेश
शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा एडेड डिग्री कालेजों में होनी थी भर्ती
एसटीएफ की जांच में प्रश्नपत्र लीक और अवैध वसूली का हुआ पर्दाफाश
आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष कीर्ति के गोपनीय सहायक की संलिप्तता उजागर
लखनऊ: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा एडेड डिग्री कालेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का पता चला है। जांच में नकल माफिया की सक्रिय भूमिका, फर्जी प्रश्नपत्र और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा को निरस्त करने का आदेश दिया है। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया गया है कि परीक्षा का आयोजन दोबारा जल्द किया जाए और यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय हो। जांच में आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष कीर्ति पांडेय के गोपनीय सहायक महबूब अली की संलिप्तता उजागर हुई। इसी कारण कीर्ति पांडेय से त्यागपत्र लिया गया था ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के तहत एडेड डिग्री कालेजों में 910 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए 16 और 17 अप्रैल 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इस भर्ती के लिए करीब 82 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा के बाद ही बड़े पैमाने पर धांधली, नकल और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आने लगी थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसटीएफ से गोपनीय जांच कराई गई।
जांच के दौरान पिछले वर्ष 20 अप्रैल को एसटीएफ ने फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया था। इन पर परीक्षा में धांधली और अवैध धन वसूली के आरोप हैं। इस संबंध में लखनऊ के थाना विभूतिखंड में मुकदमा दर्ज किया गया। मुख्य आरोपी महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने माडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निकाल लिए थे और उन्हें पैसे लेकर कई अभ्यर्थियों को दिया। एसटीएफ की गहन विवेचना और डाटा एनालिसिस से इसकी पुष्टि हुई। जांच के क्रम में गिरफ्तार अभियुक्तों और उनसे जुड़े अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन नंबरों का डाटा विश्लेषण किया गया। मुखबिर तंत्र से मिली सूचनाओं के आधार पर अन्य संदिग्ध लोगों के नाम भी सामने आए।
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